Acts 1:16 in Urdu 16 “ऐ भाइयों उस नबूव्वत का पूरा होना ज़रूरी था जो रूह -उल -क़ुद्दूस ने दाऊद के ज़बानी उस यहूदा के हक़ में पहले कहा था, जो ईसा' के पकड़ने वालों का रहनुमा हुआ।
Other Translations King James Version (KJV) Men and brethren, this scripture must needs have been fulfilled, which the Holy Ghost by the mouth of David spake before concerning Judas, which was guide to them that took Jesus.
American Standard Version (ASV) Brethren, it was needful that the Scripture should be fulfilled, which the Holy Spirit spake before by the mouth of David concerning Judas, who was guide to them that took Jesus.
Bible in Basic English (BBE) My brothers, the word of God had to be put into effect, which the Holy Spirit had said before, by the mouth of David, about Judas, who was guide to those who took Jesus,
Darby English Bible (DBY) Brethren, it was necessary that the scripture should have been fulfilled, which the Holy Spirit spoke before, by the mouth of David, concerning Judas, who became guide to those who took Jesus;
World English Bible (WEB) "Brothers, it was necessary that this Scripture should be fulfilled, which the Holy Spirit spoke before by the mouth of David concerning Judas, who was guide to those who took Jesus.
Young's Literal Translation (YLT) `Men, brethren, it behoved this Writing that it be fulfilled that beforehand the Holy Spirit spake through the mouth of David, concerning Judas, who became guide to those who took Jesus,
Cross Reference Matthew 26:47 in Urdu 47 वो ये कह ही रहा था, कि यहूदाह जो उन बारह में से एक था, आया, और उसके साथ एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियाँ लिए सरदार काहिनों और क़ौम के बुज़ुर्गों की तरफ़ से आ पहुँची।
Matthew 26:54 in Urdu 54 मगर वो लिखे हुए का यूँ ही होना ज़रूर है क्यूँ कर पूरे होंगे?”
Matthew 26:56 in Urdu 56 मगर ये सब कुछ इसलिए हुआ कि नबियों की नबूव्वत पूरी हों।” इस पर सब शागिर्द उसे छोड़ कर भाग गये|
Mark 12:36 in Urdu 36 दाऊद ने ख़ुद रूह -उल -क़ुद्स की हिदायत से कहा है‘ख़ुदावन्नद ने मेरे ख़ुदावन्द से कहा; मेरी दहनी तरफ़ बैठ जब तक में तेरे दुश्मनों को तेरे पावँ के नीचे की चौकी न कर दूँ।’
Mark 14:43 in Urdu 43 वो ये कह ही रहा था कि फ़ौरन यहूदाह जो उन बारह में से था और उसके साथ एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए सरदार काहिनों और फ़क़ीहों की तरफ़ से आ पहुँची।
Luke 22:47 in Urdu 47 वह अभी यह बात कर ही रहा था कि एक हुजूम आ पहुँचा जिस के आगे आगे यहूदाह चल रहा था। वह ईसा' को बोसा देने के लिए उस के पास आया।
John 10:35 in Urdu 35 उन्हें ‘ख़ुदा’ कहा गया जिन तक यह पैग़ाम पहुँचाया गया। और हम जानते हैं कि कलाम-ए-मुक़द्दस को रद नहीं किया जा सकता।
John 12:38 in Urdu 38 यूँ यसायाह नबी की पेशेनगोई पूरी हुई,
John 13:18 in Urdu 18 मैं तुम सब की बात नहीं कर रहा। जिन्हें मैंने चुन लिया है उन्हें मैं जानता हूँ। लेकिन कलाम-ए-मुक़द्दस की उस बात का पूरा होना ज़रूर है, ‘जो मेरी रोटी खाता है उस ने मुझ पर लात उठाई है।’
John 18:2 in Urdu 2 यहूदाह जो उसे दुश्मन के हवाले करने वाला था वह भी इस जगह से वाक़िफ़ था, क्यूँकि ईसा वहाँ अपने शागिर्दों के साथ जाया करता था।
John 19:28 in Urdu 28 इस के बाद जब ईसा ने जान लिया कि मेरा काम मुकम्मल तक पहुँच चुका है तो उस ने कहा, “मुझे प्यास लगी है।” (इस से भी कलाम-ए-मुक़द्दस की एक पेशीनगोई पूरी हुई।)
John 19:36 in Urdu 36 यह यूँ हुआ ताकि कलाम-ए-मुक़द्दस की यह नबूवत पूरी हो जाए, “उस की एक हड्डी भी तोड़ी नहीं जाएगी।”
Acts 1:20 in Urdu 20 क्यूँकि ज़बूर में लिखा है, 'उसका घर उजड़ जाए , और उसमें कोई बसनें वाला न रहे और उसका मर्तबा दुसरा ले ले।'
Acts 2:23 in Urdu 23 जब वो खु़दा के मुक़र्ररा इन्तिज़ाम और इल्में साबिक़ के मुवाफ़िक़ पकड़वाया गया तो तुम ने बेशरा लोगों के हाथ से उसे मस्लूब करवा कर मार डाला।
Acts 2:29 in Urdu 29 ऐ भाइयों! मैं क़ौम के बुज़ुर्ग, दाऊद के हक़ में तुम से दिलेरी के साथ कह सकता हूं कि वो मरा और दफ़न भी हुआ; और उसकी क़ब्र आज तक हम में मौजूद है।
Acts 2:37 in Urdu 37 जब उन्हों ने ये सुना तो उनके दिलों पर चोट लगी ,और पतरस और बाक़ी रसूलों से कहा, “ऐ भाइयों हम क्या करें?”
Acts 4:25 in Urdu 25 तूने रूह-उल-क़ुद्दूस के वसीले से हमारे बाप अपने ख़ादिम दाऊद की ज़ुबानी फ़रमाया कि, “क़ौमों ने क्यूं धुम मचाई ? और उम्मतों ने क्यूं बातिल ख़याल किए ?
Acts 7:2 in Urdu 2 उस ने कहा, “ऐ भाइयों! और बुज़ुर्गो, सुनें। ख़ुदा ऐ' ज़ुल- जलाल हमारे बाप अब्राहम पर उस वक़्त ज़ाहिर हुआ जब वो हारान में बसने से पहले मसोपोतामिया में था।
Acts 13:15 in Urdu 15 फिर तौरेत और नबियों की किताब पढ़ने के बा'द इबादतख़ाने के सरदारों ने उन्हें कहला भेजा “ऐ भाइयों अगर लोगों की नसीहत के वास्ते तुम्हारे दिल में कोई बात हो तो बयान करो।”
Acts 13:26 in Urdu 26 ऐ भाइयों! अब्रहाम के बेटो और ऐ ख़ुदा से डरने वालों इस नजात का कलाम हमारे पास भेजा गया।
Acts 13:38 in Urdu 38 पस, ऐ भाइयो! तुम्हें मा' लूम हो कि उसी के वसीले से तुम को गुनाहों की मु'आफ़ी की ख़बर दी जाती है। ,
Acts 15:7 in Urdu 7 और बहुत बहस के बा'द पतरस ने खड़े होकर उन से कहा कि “ऐ भाइयों तुम जानते हो कि बहुत अर्सा हुआ जब “ख़ुदा” ने तुम लोगों में से मुझे चुना कि ग़ैर क़ौमें मेरी ज़बान से ख़ुशखबरी का कलाम सुनकर ईमान लाएँ।
Acts 15:13 in Urdu 13 जब वो ख़ामोश हुए तो या'क़ूब कहने लगा कि “ऐ भाइयो मेरी सुनो!”
Acts 22:1 in Urdu 1 ऐ भाइयों और बुज़ुर्गो, “मेरी बात सुनो, जो अब तुम से बयान करता हूँ।”
Acts 23:1 in Urdu 1 पौलुस ने सद्र- ऐ आदालत वालों को ग़ौर से देख कर कहा “ऐ भाइयों, मैंने आज तक पूरी नेक नियती से “ख़ुदा” के वास्ते अपनी उम्र गुज़ारी है।”
Acts 23:6 in Urdu 6 जब पौलुस ने ये मा'लूम किया कि कुछ सदूक़ी हैं और कुछ फ़रीसी तो अदालत में पुकार कर कहा, “ऐ भाइयों, मैं फ़रीसी और फ़रीसियों की औलाद हूँ । मुर्दों की उम्मीद और क़यामत के बारे में मुझ पर मुक़द्दमा हो रहा है”
Acts 28:17 in Urdu 17 तीन रोज़ के बा'द ऐसा हुआ कि उस ने यहूदियों के रईसों को बुलवाया और जब जमा हो गए, तो उन से कहा, “ऐ भाइयों हर वक़्त पर मैंने उम्मत और बाप दादा की रस्मों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया। तोभी यरूशलीम से क़ैदी होकर रोमियों के हाथ हवाले किया गया।
Acts 28:25 in Urdu 25 जब आपस में मुत्तफ़िक़ न हुए, तो पौलुस की इस एक बात के कहने पर रुख़्सत हुए; कि रूह -उल क़ुद्दूस ने यसा'याह नबी के ज़रिये तुम्हारे बाप दादा से ख़ूब कहा कि।
Hebrews 3:7 in Urdu 7 पस जिस तरह कि रूह-उल-क़ुद्दूस फ़रमाता है, “अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,”
1 Peter 1:11 in Urdu 11 उन्होंने इस बात की तहक़ीक़ की कि मसीह का रूह जो उस में था,और पहले मसीह के दुखों और उनके बा'द के जलाल की गवाही देता था, वो कौन से और कैसे वक़्त की तरफ़ इशारा करता था|
2 Peter 2:21 in Urdu 21 क्यूँकि रास्तबाज़ी की राह का न जानना उनके लिए इससे बेहतर होता कि उसे जान कर उस पाक हुक्म से फिर जाते, जो उन्हें सौंपा गया था।